बुध सूर्य ग्रह के सम्बन्ध निकटतम ग्रह है। इसे नंगी आँखों से प्रायः नहीं देखा जा सकता। यह सूर्य से 5,80,00,000 कि.मी. की दूरी पर स्थित है और इसका परिक्रमण काल 88 दिन है। सूर्य का सबसे निकट ग्रह होने के कारण यह सूर्य के समीप रहकर सूर्य की परिक्रमा करता है। यह सदा प्रातः काल पूर्वी दिशा में तथा सायंकाल पश्चिमी दिशा में ही दिखाई देता है। इसका व्यास केवल 5160 कि.मी. है और इसका गुरुत्व बल पृथ्वी के गुरुत्व बल का लगभग एक तिहाई है। पृथ्वी पर यह बुध ग्रह सबसे छोटा ग्रह माना जाता है। यह सूर्य के चारों ओर परिक्रमण करता रहता है और अपनी धुरी पर भी घूमता रहता है। सूर्य के चारों ओर परिक्रमण के कारण यह कभी पश्चिम दिशा में, कभी पूर्व दिशा में दिखाई देता है। बुध पूर्व दिशा में उदय होने के कारण सायंकाल दिखाई देता है तथा अस्त होने के कारण दिन के समय दिखाई नहीं देता। इसी प्रकार पश्चिम दिशा में उदय होने पर यह प्रातःकाल दिखाई देता है। अस्त के बाद कुछ दिनों तक यह दिखाई नहीं देता।
बुध की गति – बुध अपनी धुरी पर 24 घण्टे 5 मिनट में पूरी तरह घूम लेता है तथा 87 दिन 23 घण्टे 15 मिनट और 16 सेकण्ड में सूर्य की परिक्रमा कर लेता है। जिस समय यह सूर्य के निकट होता है तब गति करके 35 मील प्रति सेकण्ड और दूर रहने पर गति करके 23 मील और मध्यम गति 29 मील प्रति सेकण्ड की गति से परिक्रमण करता है। यह एक वर्ष में एक लाख नौ हजार मील की गति से चलता है। स्थूल मान से बुध एक राशि पर 25 दिन व एक नक्षत्र पर 8 1/2 दिन रहता है। सूर्य से 27 डिग्री अंश की दूरी से आगे होने पर यह वक्री हो जाता है। जिस राशि पर यह वक्री होता है, उस पर 25 दिन ही रह पाता है। बुध की गति में तीव्र गति वाला होने के कारण यह पूर्व में अस्त और पश्चिम में उदय होता है और जब यह वक्री होता है तब पश्चिम में अस्त व पूर्व में उदय होता है। वक्री होने की
स्थिति में यह सूर्य से 12 डिग्री अंश की दूरी पर तथा मार्गी होने पर 13 डिग्री अंश पर अस्त हो जाता है। यह सूर्य से दूसरी राशि पर जाने से वक्री और वक्री होने पर धीमागामी होता है। यह 92 दिन मार्गी और 23 दिन वक्री रहता है। मार्गी होने पर 37 दिन उदित और 36 दिन अस्त रहता है। वक्री होने पर 33 दिन उदित और 16 दिन अस्त रहता है। जब बुध की गति 113/32 घटी पल की होती है तब यह परम शीघ्रगामी या अतिचारी हो जाता है और इस स्थिति में 20 दिन रहता है। यह एक वर्ष में तीन बार वक्री होता है। बुध वक्री होने पर एक दिन आगे या पीछे स्थित भी प्रतिगामी हो जाता