माँ की भावुक विदाई और शिव-शक्ति मिलन ?
"विदाई के आंसू, आँखों में भर आए,
माँ के जाने का, हर कोई दुःख मनाए।
नंगे पांव, नम आँखों से, विदा किया हमने,
फिर अगले बरस, माँ को बुलाने के लिए।"
नवरात्रि के समापन पर माँ सिद्धिदात्री की यह विदाई हृदय को छू लेने वाली है। जहाँ एक ओर भक्त और स्वयं नंदी महाराज अश्रुपूरित नेत्रों से माँ को विदा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महादेव स्वयं बाहें फैलाए माँ का स्वागत कर रहे हैं। यह 'शिव-शक्ति' के अटूट मिलन का प्रतीक है।
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जीवन में विदाई या कठिन समय केवल एक पड़ाव है, अंत नहीं। यदि आपके जीवन में भी संघर्ष या मानसिक अशांति है, तो ग्रहों की स्थिति का सही विश्लेषण आपको नई राह दिखा सकता है। माँ और शिव के आशीर्वाद से हम आपकी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करते हैं।
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